क्या अब जातीय जनगणना को मुद्दा बनाकर बिहार में वापसी कर पाएंगे लालू ?

पटना, 13/7 : राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने आज अपनी राजनीति को नयी धार देने के लिए पटना में राजभवन मार्च के लिए सडक पर उतरे. उनकी मांग है कि जातीय जनगणना की रिपोर्ट  सार्वजनिक  की जाये. लालू ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर मंडल से भी बडा आंदोलन खडा करेंगे. उनके बेटे तेज प्रताप ने कहा कि जिसकी संख्या जितनी भारी, उसकी उतनी भागीदारी. लालू प्रसाद ने कहा है कि जातीय आधार पर जनगणना हुई है, तो उसकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र को यह रिपोर्ट जारी करना होगा. लालू का यह मार्च गांधी मैदान से शुरू होकर डाकबंगला चौराहा, स्टेशन गोलंबर होते हुए आर के ब्लॉक पहुंचा जहां उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित किया.

गौरतलब है कि मंडल व कमंडल की बात करने वाले लालू यादव की राजनीति में शुरू  से ही जातीय समीकरण एक अहम तत्व रहा है. आज अपनी सभा के दौरान भी उन्होंने विधानसभा चुनाव को कमंडल बनाम मंडल की लडाई बतायी. लेकिन क्या जाति आधारित राजनीति से आने वाले विधानसभा चुनाव में लालू यादव को कोई फायदा होगा यह देखने का विषय है. हाल ही में मोदी को पहला ओबीसी प्रधानमंत्री बताये जाने पर भी काफी हो हल्ला मचाया गया. अमित शाह ने जब यह कहकर अपनी पार्टी की  पीठ थपथपायी की भाजपा ने पहली बार देश को ओबीसी प्रधानमंत्री दिया तो विपक्ष ने इसको लेकर खूब हो हंगामा मचाया. इसमें लालू ने कहा कि भाजपा से पहले हमने देश को ओबीसी प्रधानमंत्री दिया था. हमने एचडी देवगौडा को प्रधानमंत्री बनाया था.

लालू यादव ने कि कहा कि 1931 के बाद से जातीय जनगणना की रिपोर्ट नहीं तैयार की गयी. इसलिए सरकार को इस रिपोर्ट को जल्द से जल्द सार्वजनकि करना चाहिए. हाल के ही विधान परिषद के चुनाव में राजद-जदयू गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने पर भी लालू आगामी चुनाव को लेकर भयभीत हैं. हालांकि उसने उस चुनाव में अपनी हार स्वीकार की लेकिन कहा कि हम विधानसभा चुनाव में बेहतर करेंगे. इधर ओबीसी और जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट को लेकर उन्हें एक मुद्दा मिल गया है.

उन्होंने आज संविधान का हवाला देते हुए कहा कि संविधान में लिखा है कि एससी/एसटी को जनसंख्या के आधार पर आरक्षण मिलेगा तो इन वर्गो की आबादी बढ़ी है. उसके अनुसार आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए. उसने गरीबों पर हमदर्दी दिखाते हुए कहा कि जाति जनगणना रिपोर्ट प्रकाशित होगा तो उसके अनुसार गरीबों के लिए बजट बनेगा. रिपोर्ट जारी कर यह बताना ही होगा कि जो गणना हुई है उसमें किसकी स्थिति क्या है.

लालू ने इसको लेकर लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान को निशाने पर लेते हुए कहा कि बीजेपी व आरएसएस का बचाव करना छोड़ दीजिए. आदिवासी गरीब की संख्या बढ़ गयी है. गरीबों के बाप-दादा को एक कमरा नसीब नहीं है. इधर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी आज एक बार फिर जातीय जनगणना की रपट जारी न करने पर केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) में खड़ा करते हैं और दूसरी तरफ जातीय जनगणना के आंकडे़ सरकार रोक रखी है. उन्होंने भाजपा पर जातिगत राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि सामाजिक, आर्थिक व जातिगत जनगणना किए गए और उसके आंकडे़ आ गए हैं. इसके बाद कुछ आंकडे़ जारी भी किए गए, फिर जातिगत आंकड़ों को क्यों रोका जा रहा है.

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