संसद में बंद नहीं होगा सस्ता खाना: स्टाफ,मीडियाकर्मी भी खाते हैं

नई दिल्ली, 26/7 :  संसद कैंटीन में रियायती दर पर खाने को लेकर हो रहे विवाद के बावजूद कार्ड पर भोजन के मूल्य में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है। संबंधित समिति का इस बारे में मानना है कि इस तरह के कदम से कर्मचारी और मीडियाकर्मी प्रभावित होंगे। संसद के खाद्य प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एपी जितेंदर रेड्डी ने कहा कि एक खास टीवी चैनल द्वारा इसको लेकर ज्यादा हो-हल्ला मचाया जा रहा है और खासकर सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है।यह इस तथ्य के बावजूद है कि सांसद इसका सबसे कम उपयोग करते हैं। बातचीत में रेड्डी ने इस मुद्दे पर हो रहे विवाद को खेदयोग्य बताते हुए कहा कि आलोचक इस चीज को नजरंदाज कर रहे हैं कि रियायती दर पर खाना कुछ कॉर्पोरेट द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अपने कर्मचारियों को सुविधा देने के तहत ऎसा करती हैं।

उन्होंने सुझाव दिया कि अगर मामला यही है तो केवल संसद के बारे में बात करना जरूरी तौर पर सांसदों के बारे में अच्छा संदेश नहीं देता तथा उन्होंने सोमवार को समिति की बैठक बुलाई है लेकिन साथ ही कहा कि दरों में परिवर्तन का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि भले ही इस मुद्दे पर हल्ला मच रहा हो लेकिन समिति के आंतरिक सर्वे में यह पता चलता है कि सत्र के दौरान 800 में से केवल 120 से 250 सांसद ही कैंटीन में खाते हैं।

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