लोकतंत्र के मंदिर की मर्यादा न टूटे: सुमित्रा महाजन

नईदिलि, ४/७ ः लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सांसदों एवं विधायकों को आज सचेत किया कि लोकतंत्र के मंदिर में मर्यादा कहीं भी टूटनी नहीं चाहिए। झारखंड विधानसभा द्वारा अपने विधायकों की क्षमता वर्धन के लिए ‘संसदीय लोकतंत्र में सिद्धान्त एवं व्यवहार’ विषय पर आयोजित दो दिनों की कार्यशाला का यहां उद्घाटन करते हुए सुमित्रा ने सभी जन प्रतिनिधियों को सचेत किया, ‘‘लोकतंत्र के मंदिर में कहीं भी मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह मर्यादा भाषा और व्यवहार दोनों पक्षों में महत्वपूर्ण है। जन प्रतिनिधि को अपना कार्य करते हुए दिखना चाहिए तो जनता अपने आप साथ देती है।’’

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद एवं विधानसभाओं में केवल चिल्लाने से कुछ नहीं होता है। कई बार जन प्रतिनिधि सोचते हैं कि चिल्लाने से अथवा हंगामा खड़ा करने से उनकी आवाज जल्दी सुनी जाती है लेकिन यह सच नहीं है। ऐसे जन प्रतिनिधियों के बारे में मान लिया जाता है कि वह चिल्लाने वाले ही लोग हैं। उन्होंने कहा कि जब जन प्रतिनिधि मर्यादाओं का पालन करते हैं तो देश की जनता और विशेषकर उनके क्षेत्र के लोग उनका अधिक सम्मान करते हैं और वह उनका अनुकरण भी करते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हमें अपने अंतर्मन के चक्षु खोलकर रखने चाहिए क्योंकि हमारे हर कार्य पर हजारों, लाखों लोगों की नजरें होती हैं। लोग आपकी ऐसी छोटी से छोटी गतिविधियों पर भी ध्यान रखते हैं जिनकी कई बार आप कल्पना भी नहीं कर पाते।’’

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायकों और सांसदों को अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए लेकिन उसके साथ ही उन्हें मर्यादा का भी पालन करना चाहिए। अपने क्षेत्र की सरकारी योजनाएँ समय से पूरी करवाना और उसे जनता को समर्पित करना यह संवेदनशीलता में आता है। जन प्रतिनिधि को इस संवेदनशीलता का पूरी तरह पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पता चला कि झारखंड विधानसभा में 81 में से 34 विधायक इस बार पहली बार चुन कर सदन में पहुंचे हैं जबकि लोकसभा में तो 2014 में आधे से अधिक सांसद पहली बार चुन कर पहुंचे हैं। अत: ऐसे जन प्रतिनिधियों की क्षमता वर्धन करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन बहुत महत्वपूर्ण है।’’उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा कि वैसे थोड़े प्रशिक्षण की आवश्यकता तो मीडिया को भी होती है क्योंकि अनेक मुद्दों एवं प्रक्रियाओं की उन्हें जानकारी नहीं होती है।

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