लैंड बिल पर बोले मोदी, कोई नहीं छीन सकता किसानों का हक

नई दिल्ली,२२/३ः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज “मन की बात” कार्यक्रम में किसानों को संबोधित किया। मोदी ने किसानों से बात करते वक्त कई मुद्दों पर चर्चा की। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने किसानों को भूमि अधिग्रहण पर विशेष चर्चा की। मोदी ने नये नियमों की चर्चा विस्तार से की। मोदी ने माना कि किसानों की अबतक अपेक्षा हुआ है।
मोदी ने कहा, मेरे प्यारे किसान भाइयो और बहनो, आप सबको नमस्कार। ये मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे आपसे बात करने का अवसर मिला है। जब मैंने किसानों के साथ बात करने के लिए सोचा, तो मुझे कल्पना नहीं थी की इतने सारे सवाल पूछेंगे, ये देखकर के मैं हैरान हो गया। आपने मुझे चौंका दिया है, लेकिन मैं इसको मेरे लिए एक प्रशिक्षण का अवसर मानता हूँ। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ, कि आपने जितने सवाल पूछे हैं, मैं उन सबके विषय में, पूरी सरकार में जागरूकता, संवेदना लाऊँगा।
कई विषयों और समस्याओं की चर्चा की गई हैं। हमें राज करने का अधिकार तब है जब हम इन छोटी छोटी बातों को भी ध्यान दें। ये सब पढ कर के तो मुझे कभी कभी शर्मिन्दगी महसूस होती थी, कि हम लोगों ने क्या किया है! मेरे पास जवाब नहीं है। मैं जरूर बदलाव के लिए, प्रामाणिकता से प्रयास करूंगा, और उसके सभी पहलुओं पर सरकार को जगाऊँगा, ये मैं विश्वास दिलाता हूँ। इस बार बेमौसमी बरसात हो गई, महाराष्ट्र में ओले गिरे। सभी राज्यों में, ये मुसीबत आयी और हर कोने में किसान परेशान हो गया।
राज्य सरकारों को मैंने कहा है कि केंद्र-राज्य मिल करके, इन मुसीबत में फंसे हुए सभी किसानों को जितनी ज्यादा मदद कर सकते हैं करें। गाँव में स़डक, बिजली नहीं है, खाद की कीमतें बढ रही हैं, आपके दर्द को मैं समझ सकता हूँ। किसान कहता है कि हम इतनी मेहनत करते हैं, लोगों का तो पेट भरते हैं लेकिन हमारा जेब नहीं भरता है, हमें पूरा पैसा नहीं मिलता है। मैं मेरे किसान भाइयों-बहनों को विश्वास दिलाता हूँ, कि मैं राज्य और भारत सरकार के सभी विभागों को और अधिक सक्रिय करूंगा।
किसान भाइयो, ये आपके ढेर सारे सवालों के बीच भूमि अधिग्रहण बिल की चर्चा है, मैं हैरान हूँ कि कैसे- कैसे भ्रम फैलाए गए हैं। मैं कोशिश करूंगा कि सत्य आप तक पहुचाऊं। जो लोग आज किसानों के हमदर्द बन कर के आंदोलन चला रहे हैं, उन्होंने भी इसी कानून के तहत देश को चलाया, राज किया। 2013 में आनन-फानन के साथ एक नया कानून लाया गया, हमने भी कंधे से कन्धा मिलाकर साथ दिया था किसान का भला हो तो साथ कौन नहीं देगा। जब हमारी सरकार बनी, तब राज्यों की तरफ से बहुत बडी आवाज उठी। इस कानून को बदलना चाहिए, कानून में कुछ कमियां हैं। एक साल हो गया, कोई राज्य कानून लागू करने को तैयार नहीं।
महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस की सरकारों ने लागू किया था। किसान हितैषी होने का दावा करने वालो ने अध्यादेश में जो मुआवजा देने का तय किया था उसे आधा कर दिया। अब ये है किसानों के साथ न्याय। ये सारी बातें देख कर लगा कि थोडा पुनर्विचार जरूरी है। यदि कुछ कमियां रह जाती हैं। तो उसको ठीक करना चाहिए।
हमारा इरादा है कि किसानों का भला हो, गाँव का भी भला हो और इसीलिए कानून में अगर कोई कमियां हैं, तो दूर करनी चाहिए आपको मालूम है, हिंदुस्तान में 13 कानून ऎसे हैं जिसमें सबसे ज्यादा जमीन संपादित की जाती है, जैसे रेलवे, नेशनल हाईवे, खदान। पिछली सरकार के कानून में 13 चीजों को बाहर रखा गया, मतलब किसानों को वही मुआवजा मिलेगा जो पिछले कानून से मिलता था।

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