राष्ट्रपति मुखर्जी ने बच्चों को पढाया राजनीति का इतिहास, अन्ना-केजरीवाल की भी की चर्चा

नयी दिल्ली, 4/9 :  राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आज शिक्षक दिवस से एक दिन पहले सर्वोदय विद्यालय के  बच्चों की क्लास ले रहे हैं. इस क्लास में राष्ट्रपति बच्चों से राजनीति के इतिहास पर चर्चा करे रहे हैं . राष्ट्रपति बच्चों को राजनीति के इतिहास की जानकारी दे रहे हैं. उन्होंने बच्चों से कहा कि आप हिचकिचाइये मत आप मुझसे जो जानना चाहे जान सकते हैं. प्रणब मुखर्जी राजनीति में अपने अनुभवों का भी जिक्र कर रहे हैं और अपने जीवन में बिताने उन लम्हों को भी याद कर रहे है. प्रणब ने कहा बताया कि हमारे जिले में सिर्फ 14 स्कूल थे. मेरा स्कूल घर से पांच किलोमीटर की दूरी पर था.

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपनी क्लास में अन्ना हजारे के आंदोलन को भी याद किया. उन्होंने कहा कि 2010-11 में जब अन्ना हजारे जन लोकपाल के लिए आंदोलन कर रहे थे, तब मैं कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों की टीम का उनसे वार्ता के लिए प्रतिनिधित्व कर रहा था. अन्ना हजारे ने इस वार्ता के लिए खुद के अलावा रिटायर्ड जस्टिस संतोष हेंगडे, वकील शांति भूषण व उनके वकील बेटे व प्रशांत भूषण व दिल्ली के मौजूदा सीएम अरविंद केजरीवाल को अपनी ओर से शामिल किया. उन्होंने इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि सांसद अगर अपना काम नहीं करेंगे, तो उस काम को जनता करेगी.

अपने बचपन को याद करते हुए राष्ट्रपति ने बताया , मैं शरारती बच्चा था मां को परेशान करता था.  मेरे स्कूल में आपकी तरह शानदार मेज औऱ बैठने की जगह नहीं थी. हमें चटाई मे बैठकर पढ़ना होता था.  बरसात के दिनों में मैं तोलिया बांधकर स्कूल जाता था. शुरू के तीन चार साल तो मैं स्कूल ही नहीं गया. राष्ट्रपति ने कहा मैं औसत छात्र था. राष्ट्रपति ने कहा,  जब हमने आजादी 1974 में हासिल कर ली तो हम  तीन साल क्यों रूके संविधान बनाने के लिए यह सवाल आपके मन में उठता होगा.

इसे लेकर बहुत काम किया गया. इसी कड़ी मेहनत का नतीजा है कि संविधान की शुरुआत प्रस्तावना से होती है.  संविधान हमें बराबरी का हक देता है. राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि क्यों आम चुनाव कराने में वक्त लगा.  उन्होंन बताया कि सर एंटनी और जवाहर लाल नेहरू अच्छे मित्र थे. एंटनी सोचते थे कि भारत में लोकतंत्र नहीं चेलेगा लेकिन बाद में उन्हें अपनी सोच को बदलना पड़ा. भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बर्मा  सब साथ-साथ आजादा हुआ. लाहौर में 1930 को जवाहर लाल नेहरू ने पूर्ण स्वराज की बात रखी. मैं आपसे उस इतिहास की चर्चा कर रहा हूं, जिसे मैंने देखा  और अनुभव किया है. हमें कई चीजों मे अभी और विकास करना है. बिजली पर आत्मनिर्भर बनना है.

प्रणव मुखर्जी की इस क्लास के लिए  स्कूल ने भी जोरदार तैयारी की थी. दिल्ली सरकार बहुत पहले से इसे लेकर प्रचार कर रही थी दिल्ली की सड़कों पर राष्ट्रपति की तस्वीर के साथ यह स्लोगन लिखा है कि इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बच्चों को पढ़ायेंगे. इस पोस्टर में लोगों से अपील की गयी कि इस कार्यक्रम का प्रसारण आप टीवी पर जरूर देखें. दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया इस कार्यक्रम को लेकर बेहद गंभीर हैं और दिनभर कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेते रहे. अधिकारियों को निर्देश देते रहे की पूरा कार्यक्रम किस तरह आयोजित किया जायेगा.

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