राजनाथ बोले, इसलिए नहीं बन पाई हिन्दी राष्ट्रभाषा

भोपाल, 12/9 :  भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नेतृत्व की कमजोरी के कारण हिन्दी राष्ट्रभाषा नहीं बन सकी है। राजनैतिक लाभ हानि के कारण इस बारे में कोई फैसला नहीं हो सका। यह हमारी बहुत बड़ी कमजोरी है।यह बात केंद्रीय गृह मंत्री‍ राजनाथ सिंह ने तीन दिवसीय 10वां के समापन अवसर पर कही।

       राजनाथ ने कहा कि जब योग के ‍लिए 177 देशों का समर्थन जुटाया जा सकता है तो हिन्दी के लिए 127 देशों का समर्थन क्यों नहीं जुटाया जा सकता। हिन्दी भारत की राजभाषा ही नहीं संपर्क भाषा भी है। गिरमिटिया मजदूर हिन्दी को भारत से बाहर लेकर गए। हिन्दी को मरने नहीं दिया। अंग्रेजी के बाद हिन्दी दुनिया में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है।
गूगल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट में हिन्दी में सर्वाधिक कंटेंट पाया जाता है। हिन्दी संस्कृत के सबसे नजदीक है, इसीलिए भारत की सभी भाषाओं की बड़ी बहन है। हिन्दी की वर्तनी सबसे वैज्ञानिक है। हिन्दी का आकर्षण विश्व में तेजी से बढ़ रहा है।  हिन्दी भारत के सांस्कृतिक और जीवन मूल्यों का समर्थन करती है।

राजनाथ सिंह ने अंग्रेजी की वकालत करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिन लोगों की सोच यह है कि अंग्रेजी ज्यादा समझी जाती है, बेबुनियाद है।

इससे पूर्व के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्व हिन्दी सम्मेलन के आखिरी दिन के मौके पर ये संकल्प लिए।

Comments

comments