भूमि अधिग्रहण विधेयक को पारित कराने हरसंभव कोशिश

नई दिल्ली,३/५ः  मोदी सरकार ने संकेत दिया है कि यदि विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक बजट सत्र में राज्यसभा में पारित नहीं होता है तो संयुक्त सत्र बुलाया जा सकता है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राज्यसभा में पारित नहीं होने पर इस विधेयक को संयुक्त सत्र में रखना संवैधानिक जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए नए भूमि अधिग्रहण कानून की दरकार है। जेटली ने कहा कि उनकी सरकार इस विधेयक को राज्यसभा में पारित कराने का पूरा प्रयास करेगी क्योंकि यह ग्रामीणों के हित में है। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में सभी अच्छे सुझावों को स्वीकार करने की कोशिश की जाएगी। ऊपरी सदन में गतिरोध बनने और विधेयक के पारित नहीं होने पर संयुक्त सत्र बुलाए जाने के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा कि यह वरीयता का सवाल नहीं है, बल्कि संवैधानिक जरूरतों से जुड़ा मुद्दा है। विधेयक के पारित करने की समयावधि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि राजनीति के कैलेंडर में अंतिम दिन नहीं होता है। विपक्षी सदस्यों को अंतिम समय तक साथ देने की अपील की जाएगी। इस विधेयक से मोदी सरकार पर अमीर और कॉर्पोरेट समर्थक होने का ठप्पा लगने और किसानों की आत्महत्या के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि आत्महत्याएं नए कानून की वजह से नहीं हो रही हैं। यह विधेयक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2013 में ही पारित हुआ था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार इस कानून में बदलाव करना चाहती है और किसान परिवार के लोगों को रोजगार देना चाहती है, इसलिए नया विधेयक लाया गया है। कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को ‘सूटकेस की सरकारÓ बताते हुए कहा है कि राहुल गांधी एक महीने तक संसद सत्र से अनुपस्थित रहने के बाद प्रतिदिन एक मुद्दे को उठाकर पार्टी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बेताव हैं।  जेटली ने कोयला और स्पेक्ट्रम घोटाले का हवाला देेते हुए कहा, ‘हमारी सरकार सूटकेस की सरकार नहीं है। लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार सूझबुझ की सरकार है। गांधी मोदी सरकार पर ‘सूटबूट की सरकारÓ अर्थात पूंजीपतियों की सरकार होने का आरोप लगाते रहे हैं। मोदी सरकार के पूंजीवादियों या अमीरों के समर्थक होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कोयला ब्लॉक और स्पेक्ट्रम आवंटन से तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व जुटाया है, जबकि संप्रग सरकार ने इसे मुफ्त के भाव दे दिया था। उन्होंने ऐसे में सरकार से सवाल किया कि कौन अमीर समर्थक है। जेटली ने गांधी के वर्तमान रूख विशेषकर किसानों पर उनके रूख को ‘अतिउत्साहÓ करार  देते हुये कहा कि यह सिर्फ और सिर्फ पार्टी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का कांग्रेस उपाध्यक्ष का प्रयास है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध कर किसानों को नुकसान पहुंचा रही है।
राज्यसभा में पारित नहीं होने पर इस विधेयक को संयुक्त सत्र में रखना संवैधानिक जरूरत होगी। देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए नए भूमि अधिग्रहण कानून की दरकार है : अरुण जेटली

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