काला धन : सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से सात अक्तूबर तक प्रगति रिपोर्ट मांगी

नयी दिल्ली, 3/9 : उच्चतम न्यायालय ने कालेधन के मामले में गठित विशेष जांच दल को सात अक्तूबर तक अपनी जांच की चौथी प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का आज निर्देश दिया. साथ ही न्यायालय ने केंद्र से जानना चाहा है कि उसने विदेशी बैंकों में जमा गैरकानूनी धन वापस लाने के बारे में विशेष जांच दल की सिफारिशें पर अमल के लिये अब तक क्या कदम उठाये हैं. प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू, न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति ए के सीकरी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई 28 अक्तूबर के लिये स्थगित करते हुये कहा, अटार्नी जनरल हमे बतायेंगे कि विशेष जांच दल की सिफारिशों पर केंद्र ने क्या करा है. विशेष जांच दल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने न्यायालय को  सूचित किया कि जांच के बारे में अगली प्रगति रिपोर्ट इस महीने के अंत तक तैयार हो जायेगी. उन्होंने अक्तूबर में यह रिपोर्ट पेश करने की न्यायालय से अनुमति मांगी. दवे ने न्यायालय से अनुरोध किया कि अटार्नी जनरल से कहा जाये कि वह विशेष जांच दल की सिफारिशों पर की गयी कार्रवाई से अवगत करायें. दवे के इस अनुरोध को न्यायालय ने स्वीकार कर लिया.

वकील प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत में मई महीने में पेश विशेष जांच दल की तीसरी रिपोर्ट का मसला उठाते हुये दावा किया कि इसके कुछ अंश समाचार पत्रों में आये हैं जिसमे शेयर बाजार में करीब तीन लाख करोड़ रुपये पी नोट्स के जरिए निवेश किये होने का जिक्र किया गया है.

हालांकि पीठ ने टिप्पणी की, हम नहीं समझते कि ऐसा कुछ रिपोर्ट में है. मई, 2015 की रिपोर्ट अंतिम रिपोर्ट थी जो हमे मिली थी. पी नोट्स पंजीकृत विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा उन विदेशी निवेशकों, जो बाजार नियामक सेबी के साथ खुद को पंजीकृत कराये बगैर ही भारत के शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं, को जारी किया जाने वाला डेरिवेटिव अनुबंध है जिनके आधार पर उनका धन भारतीय प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है.

भूषण के इस तरह के कथन के दौरान ही अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने इस पर आपत्ति करते हुये कहा कि इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है. दवे ने कहा कि काले धन का मामला संवेदनशील है और सार्वजनिक रुप से इस पर चर्चा उचित नहीं है.

इससे पहले, सुनवाई की पिछली तारीख पर वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने विदेशों में जमा काला धन वापस लाने में विफल रहने के लिये राजग सरकार और पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की आलोचना की थी. जेठमलानी की जनहित याचिका पर ही न्यायालय ने विशेष जांच दल गठित किया है.

जेठमलानी ने विशेष जांच दल की भी आलोचना की थी. उन्होंने कहा कि इसे पिछली सरकार के प्रति बफादार लोगों की भरमार है. जेठमलानी ने कहा था कि जुलाई, 2011 के फैसले को सरकारों ने निरर्थक बना दिया है क्योंकि उन्होंने देश और इसकी जनता के साथ गंभीर छल किया है.

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