शहीद सौरभ केस में सरकार पलटी, जाएगी अंतरराष्ट्रीय कोर्ट

नई दिल्ली, २/६ः  कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने भारत के एक फौजी अफसर सौरभ कालिया को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। सरकार ने पहले इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में ले जाने मना कर दिया लेकिन अब यूटर्न लेते हुए सरकार ने कहा कि वह इस मामले को पुरजौर तरीके से उठाएगी।
सुबूत सामने आने के बाद से शहीद के पिता इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। अपने पूर्व रुख से पलटते हुए भारत ने कहा है कि वह कारगिल शहीद सौरभ कालिया के मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को लागू करने का विकल्प खुला हुआ है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मामले पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में इजाजत लेगी और अगर शीर्ष कोर्ट ने इजाजत दी तो यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में उठाया जाएगा।
नरेंद्र मोदी जिस वक्त चुनाव प्रचार कर रहे थे उस वक्त उन्होंने पाकिस्तान द्वारा शहीद हेमराज का सिर काट लिए जाने को लेकर यूपीए सरकार पर खूब निशाना साधा था और खुद शहीद के घर पहुंचे थे। लेकिन सौरभ कालिया के मामले में आखिर ऐसा क्या हुआ कि सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय अदालत जाने से इंकार कर दिया?
सरकार ने संसद में इसकी जानकारी एक प्रश्न के जवाब में दी, जिसके बाद से यह मामला तूल पकड़ने लगा है। सरकार ने कहा था कि पड़ोसियों के साथ रिश्तों को ध्यान में रखते हुए आईसीजे में जाना कानूनी रूप से वैध नहीं होगा।
वर्ष 1999 में शहीद कालिया के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर ऐसी मांग की थी। तब विपक्ष में रही बीजेपी सरकार ने यूपीए सरकार के ऐसे ही फैसले पर उसे जमकर घेरा था। 15 मई 1999 को कैप्टन सौरभ कालिया पाकिस्तान के चंगुल में फंस गए थे। पाकिस्तान में उन्हें यातनाएं दी गईं और अंत में क्षत-विक्षत अवस्था में उनके शव भारत को सौंप दिए गए।
पहले यूपीए सरकार और अब एनडीए सरकार ने इस मुद्दे पर शायद उतनी गंभीरता नहीं दिखाई है जिसकी ज़रूरत देश महसूस कर रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त तक मोदी सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।

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