मोदी स्वदेश रवाना, दिया एशिया की एकजुटता पर जोर

सिओल, १९/५ः  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना तीन देशों का दौरा खत्म कर मंगलवार को कोरिया से भारत के लिए रवाना हो गए। प्रधानमंत्री भारतीय समयानुसार रात करीब 11:30 बजे भारत पहुंचेंगे। इससे पहले वैश्विक निवेशकों को आमंत्रित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपेक्षाकृत अधिक स्थिर और भरोसेमंद कराधान प्रणाली का वायदा किया और कहा कि उनकी सरकार भारत को कारोबार के लिए सुगम गंतव्य बनाने के लिए पूरे जोश-खरह्वोश के साथ काम कर रही है। मोदी ने अपनी तीन देशों की यात्रा के आखिरी दिन दक्षिण कोरिया के मुख्य कार्यकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पिछले एक साल में राजनीति, शासन प्रणाली और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बहाल की है।उन्होंने कहा, लेकिन हम यहीं नहीं ठहरने वाले हैं, हमें बहुत बेहतर करना है और हम करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) महत्वपूर्ण है और यह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कारोबारी माहौल के बिना भारत नहीं आएगा। इसलिए हम भारत को कारोबार के लिहाज से बेहद सुगम गंतव्य बनाने की दिशा में पूरे जोश-खरोश के साथ काम कर रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, इस्पात, रेलवे, पोत निर्माण और आवास जैसे क्षेत्रों में कोरियाई कंपनियों के साथ गठजोड की आकांक्षा जताते हुए मोदी ने कहा कि कोरियाई निवेशकों के सहयोग के लिए एक प्रतिबद्ध प्रणाली तैयार की जा रही है। इसे कोरिया प्लस के तौर पर जाना जाएगा। इसके अलावा मैं आश्वास्त करता हूं कि यदि कोई समस्या होती है, तो मैं व्यक्तिगत तौर पर इस पर ध्यान दूंगा। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 11 महीने में कारोबारी माहौल में सुधार और निवेशकों का भरोसा बढाने के लिए कई पहलें की हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियाई देशों के बीच एकता की वकालत करते हुए कहा कि उन्हें विश्व को आकार देने के लिए और संयुक्त राष्ट्र समेत शासन की वैश्विक संस्थाओं में सुधार के लिए एशियाई होने के तौर पर काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिणी कोरिया की राजधानी सिओल में आयोजित छठे एशिया नेतृत्व सम्मेलन में कहा, “यदि एशिया को एक बनकर उभरना है तो उसे अपने आपको क्षेत्रीय धडे के रूप में नहीं सोचना चाहिए।” प्रतिद्वंद्वता के कारण एशिया महाद्वीप के पिछडने का जिR करते हुए उन्होंने एशियाई देशों से अपनी साझी विरासत और युवा ऊर्जा का इस्तेमाल एक साझा उद्देश्य को हासिल करने के लिए कहा। मोदी ने कहा, “एकजुट एशिया विश्व को आकार देगा।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत साझा समृद्धि वाला एक ऎसा एशिया चाहता है, जहां एक राष्ट्र की सफलता दूसरे की ताकत बने। एशिया के पुनरोदय को इस युग की महानतम घटना करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हमें संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद समेत वैश्विक संस्थानों के प्रशासन में सुधार के लिए एशियाई के रूप में काम करना चाहिए।” मोदी ने कहा कि भारत का विकास एशिया की सफलता की कहानी होगी और यह एशियाई सपने को एक बडी हकीकत बनाने में मदद करेगा। चीन और मंगोलिया की यात्रा के बाद दक्षिण कोरिया पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “एशिया के बारे में मेरा सपना ऎसा है जहां सभी एशियाई साथ विकास करें, भारत के भविष्य के बारे में मैंने जो सपना देखा है, वही मैं हमारे पडोसियों के भविष्य के लिए चाहता हूं। देश के भीतर और बाहर हमारा विकास और अधिक समावेशी होना चाहिए।” भारत के एशिया के चौराहे पर खडा होने का जिR करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हम एक दूसरे के साथ जुडे एशिया के निर्माण संबंधी अपनी जिम्मेदारी को निभायेंगे।”

चूंकि कुछ एशियाई देश अधिक समृद्ध हो गए हैं, ऎसे में उन्हें अपने संसाधनों और बाजार में ऎसे देशों को हिस्सेदारी देने के लिए तैयार रहना चाहिए जिन्हें इनकी जरूरत है। यह राष्ट्रीय सरकारों का कर्तव्य ही नहीं बल्कि एक क्षेत्रीय जिम्मेदारी भी है। “लोकतंत्र के स्तम्भ” के रूप में दक्षिण कोरिया की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कोरिया का आर्थिक चमत्कार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उसके वैश्विक नेतृत्व ने एशियाई शताब्दी के वादे को और वास्तविक बना दिया है। उन्होंने कहा, “अब एशिया की सफलता को बरकरार रखने की बारी भारत की है.. भारत की क्षमता के बारे में कभी भी संदेह नहीं रहा है और पिछले वर्ष हमने वादे को वास्तविकता और उम्मीदों को विश्वास में बदला है।” मोदी ने कहा कि भारत का विकास प्रतिवर्ष 7.5 प्रतिशत की दर पर लौट आया है और इसके और बढने की संभावना मजबूत है। एशियाई नेताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “दुनिया एक स्वर में कह रही है कि भारत हमारे क्षेत्र और दुनिया में उम्मीदों का नया प्रकाशपुंज है। मानवता के छठे हिस्से का विकास दुनिया को भी एक अवसर प्रदान करेगा। यह भारत को हमारी दुनिया के लिए अधिक काम करने की क्षमता प्रदान करेगा।” मोदी ने कहा कि एशिया और सफलता हासिल करेगा, अगर सभी एशियार्द साथ मिलकर आगे बढेंगे। ”

यह ऎसे देशों का महाद्वीप नहीं होना चाहिए जहां कुछ राष्ट्र आगे बढे रहे हो और अन्य नीचे जा रहे हो। यह ऎसा नहीं होना चाहिए जहां कुछ क्षेत्रों में स्थिरता हो और अन्य टूटी संस्थाएं हो।” मोदी ने कहा कि युवाओं को कौशल एवं शिक्षा सम्पन्न होना चाहिए ताकि वे भविष्य को उम्मीद भरी नजरों से देख सकें। उन्होंने कहा, “अगले 40 वषोंü में तीन अरब एशियाई अपने को समृद्धि की नयी उंचाइयों पर ले जायेंगे। एशिया की समृद्धि और बढती आबादी हमारे सीमित संसाधनों के समक्ष बडी मांग पेश करेगी। धरती पर हमारे पैर के निशान हल्के पडने चाहिए क्योंकि हमारा आर्थिक वजन बढ रहा है। – See more at: http://www.khaskhabar.com/picture-news/news-pm-narendra-modi-pitches-for-make-in-india-in-south-korea-1-24269.html#sthash.4DmeDiHK.dpuf

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