भारतीय मछुआरों ने लांघी सीमा तो मार देंगे गोली:श्रीलंकाई PM

चेन्नई,७/३ः  श्रीलंकाई प्रधानमंत्री रानिल विRमसिंघे ने तमिल कहा है कि अगर भारतीय मछुआरे श्रीलंका के जलक्षेत्र में प&प्त8206;वेश करने की हिमाकत करेंगे, तो हमारी नौसेना उन पर कार्रवाई करते हुए गोली भी मार सकती है इसलिए भारतीय मछुआरों को हमारे जलक्षेत्र से दूर रहना चाहिए। श्रीलंका के प&प्त8206;धानमंत्री की यह सख्त टिप्पणी ऎसे समय में आई है जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते श्रीलंका की यात्रा पर जाने वाले हैं। विक&प्त8206;मसिंघे ने शुक्रवार रात थांती टीवा चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हमारी नेवी कानून के मुताबिक भारतीय मछुवारों पर कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि जब भारतीय मछुवारे श्रीलंका के जलक्षेत्र में प्रवेश करते हैं तभी उन पर बल प्रयोग किया जाता है, इसलिए मछुवारों को हमारे जलक्षेत्र से दूर रहना चाहिए। विक&प्त8206;मसिंघे ने चैनल से बातचीत में कहा, यदि कोई मेरा घर तोडने की कोशिश करेगा, तो मैं उसे गोली मार सकता हूं। यदि वह मारा जारता है, तो हमारे देश का कानून इसका इजाजत देता है। यह हमारा जलक्षेत्र है। जाफना के मछुआरों को मछली पकडने की इजाजत मिलनी चाहिए।
हम लोग मछली पकडने से रोक सकते हैं। यहां भारतीय मछुआरे क्यों आते हैं! जाफना के मछुआरे यहां के लिए सक्षम हैं। एक उचित बंदोबस्त की जरूरत है, लेकिन हमारे उत्तरी मछुआरों की आजीविका की कीमत पर यह सब नहीं हो सकता है। विक&प्त8206;मसिंघे ने कहा, मछुआरों पर गोलीबारी मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है। आप हमारे जलक्षेत्र में क्यों आ रहे हैं! आप हमारे जलक्षेत्र से मछली क्यों पकड रहे हैं! आप भारतीय हिस्से में ही रहें। इसके बाद कोई समस्या नहीं होगी। कच्चाातिवु श्रीलंका के लिए एक अहम सवाल है। कच्चाातिवु श्रीलंका का हिस्सा है। इस पर दिल्ली की राय भी हमारी तरह ही है, लेकिन मैं जानता हूं कि यह तमिलनाडु की सियासत का हिस्सा है। मछुआरों के मुद्दे पर दोनों तरफ से बातचीत जारी है और भारतीय प्रधानमंत्री अगले हफ्ते श्रीलंका की यात्रा पर पहुंचने वाले हैं, ऎसे वक्त में विRमसिंघे की यह बेहद सख्त टिप्पणी आई है।
भारत-श्रीलंका संबंध में चीन फैक्टर पर श्रीलंकाई पीएम ने कहा, हम भारत-श्रीलंका संबंध को चीन-श्रीलंका संबंध से अलग रखना चाहते हैं। दोनों देश हमारे लिए अहम हैं। भारतीय नेताओं के खंडन को खारिज करते हुए विRमसिंघे ने स्पष्ट कहा कि 2009 में लिबरेशन टाईगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) के खिलाफ युद्ध में भारत ने श्रीलंका को मदद दी थी। उन्होंने ताना कसते हुए कहा कि राजनेताओं के बीच स्मरण शक्ति का जाना बहुत सामान्य सी बात है। तमिल शरणार्थियों की श्रीलंका वापसी पर विRमसिंघे ने कहा कि ये अपनी जन्मभूमि पर आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी बिल्कुल सही हालात हैं। श्रीलंकाई पीएम ने कहा, यदि इनके मन में शंका है और ये कुछ वक्त चाहते हैं तो इन्हें और समय मिलना चाहिए। तमिलों के खिलाफ नरसंहार के लिए श्रीलंकाई सरकार की प्रतिबद्धता वाले उत्तरी प्रांत द्वारा पास किए गए नए प्रस्ताव की विRमसिंघे ने कडी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री का बेहद गैर जिम्मेदाराना रवैया है। विRमसिंघे ने कहा, मैं इससे सहमत नहीं हूं। जब मुख्यमंत्री इस तरह के प्रस्तावों को पास करता है तो उसके साथ संवाद मुश्किल हो जाता है। हम तमिल नेशनल अलायंस के एमपी आर संपथन और दूसरे तमिल नेताओं के जरिए समस्या के समाधान की कोशिश कर रहे हैं। हां, यहां युद्ध हुआ था, लोगों की हत्याएं हुईं लेकिन सभी तरफ से।
याद कीजिए यहां तमिलों के साथ मुस्लिम और सिंघली भी मारे गए थे। विRमसिंघे ने श्रीलंका के पूर्व राष्ट&प्त8207;पति महिंदा राजपक्षे पर 2005 के चुनाव में लिट्टे प&प्त8206;मुख वी प्रभाकरण को पैसे देने आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 2005 में जाफना के लोगों को वोट देने की अनुमति दी जाती तो 2009 में यहां पर जो कुछ भी हुआ इससे बचा जा सकता था। राजपक्षे को राष्ट&प्त8207;पति किसने बनाया! साउथ के लोगों ने नहीं, यह सच है। यह राजपक्षे और लिट्टे के बीच की डील थी। राजपक्षे ने लिट्टे को पैसे खिलाए थे। जिन्होंने पैसे खाए उनमें से अमीरकांथन भी एक है जो अब भी मध्य-पूर्व में कहीं मौजूद है। इसी कारण से वह अच्छी तरह से जाना जाता है।

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