दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से हमारे ऐतिहासिक संबंध:मोदी

नई दिल्ली, 11/9 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन और 11वीं पूर्व एशिया शिखर बैठक में हिस्सा लेने के लिए आज वियानतियाने,

लाओ पीडीआर पहुंचे। प्रधानमंत्री ने वहां रवाना होने से पहले अपने फेसबुक संदेश में कहा था कि मैं 14वें आसियान-भारत शिखर सम्‍मेलन और 11वें पूर्वी एशियाई शिखर सम्‍मेलन में भाग लेने के लिए वियानतियाने, लाओ पीडीआर के दौरे पर रहूंगा, इन शिखर सम्‍मेलनों में भाग लेने का मेरा यह तीसरा मौका है। उन्होंने कहा कि आसियान भारत की एक्‍ट ईस्ट पॉलिसी का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सेदार है, जो भारत में पूर्वोत्तर क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आसियान के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी इस क्षेत्र में हमारे सुरक्षा हितों की रक्षा करने और बढ़ावा देने के साथ ही पारंपरिक और गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में भी महत्‍वपूर्ण है।
नरेंद्र मोदी ने कहा कि पूर्वी एशियाई शिखर सम्‍मेलन एशिया प्रशांत क्षेत्र की चुनौतियों और अवसरों के बारे में विचार-विमर्श करने के लिए एक अग्रणी मंच है। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ सचमुच हमारे ऐतिहासिक संबंध हैं, हमारी वचनबद्धता और पहुंच को महज़ एक शब्‍द-संपर्कता के रूप में एक साथ बांध सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम अपनी भौतिक और डिजिटल संपर्कता को बढ़ाना चाहते हैं, ताकि जन-जन के बीच अधिक संपर्क कायम हो, हमारे संस्‍थागत संपर्क मजबूत हों और हमारी सभी जनता के परस्‍पर लाभ के लिए एक आधुनिक और आपस में जुड़ा हुआ विश्‍व तैयार हो सके। उन्होंने कहा कि इस दौरे पर परस्‍पर सरोकार से जुड़े द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के लिए भागीदार देशों के नेताओं के साथ बातचीत करने का अवसर भी मिलेगा। प्रधानमंत्री ने भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी में आसियान को महत्वपूर्ण भागीदार बताया।
आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में 10 सदस्य देशों और 18 पूर्व एशिया के राष्ट्र प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन आसियान 10 दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का समूह है, जिसकी स्थापना 8 अगस्त 1967 को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आसियान घोषणापत्र के हस्ताक्षर के साथ की गई थी। इसका उद्देश्य आपस में आर्थिक विकास और समृद्धि को बढ़ावा और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता कायम करने के लिए काम करना है। इसके संस्थापक सदस्य थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और सिंगापुर थे, लेकिन अब ब्रूनेई, वियतनाम, लाओस और म्यांमा भी इसमें शामिल हो गए हैं।

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