किस हद तक तबाह हुआ नेपाल, जानिए छुपी हुई हकीकत

काठमांडू, ३०/४ः काठमांडू से लेकर भूकंप का केंद्र लामजुंग और पोखरा के आस-पास तक के गांवों में कुछ नहीं बचा है। गांवों में 90 प्रतिशत से अधिक मकान मलबे में तब्दील हो गए हैं और भूकंप से आई तबाही की असल तस्वीर अभी मलबे में दबी है। राहत एवं बचाव कार्य काठमांडू में चल रहा है और वह भी जरूरत के लिहाज से बहुत कम है। अभी तक मरने और घायल होने वालों का सही आंकड़ा नहीं आ पाया है।

गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों में तो राहत एवं बचाव सेवाएं अभी तक नहीं पहुंची हैं । चिकित्सकों, दवाओं की कमी तो है ही, मूलभूत सुविधाओं की भी काफी कमी महसूस हो रही है। खाने-पीने का सामना और कई इलाकों में इसकी उपलब्धता भी बड़ी चुनौती है। लोगों के पास कुछ नहीं बचा है। जिनके मकान कच्चे हैं, वह धराशायी हो चुके हैं। उनके पास जो भी खाने-पीने का सामान था, वह भी मलबे के नीचे दबा है।

हजारों लोग अभी अपने परिजनों और रिश्तेदारों की तलाश में मारे-मारे फिर रहे हैं। यहां तक कि काठमांडू में भी बिजली, पानी और संचार की सेवाएं बहाल नहीं हो पाई हैं। भूकंप को लेकर लोगों की स्थिति यह है कि वह दहशत के मारे घरों में रहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। कुछ भी हो रहा है तो लोगों को भूकंप आने का अंदेशा हो रहा है। इसलिए बड़ी आबादी खुले आसमान के नीचे रह रही है। ऐसे में टेंट की भारी कमी महसूस हो रही है। इस समय सबसे बड़ी जरूरत काठमांडू के अलावा बाहर भी ध्यान की है।

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